वो जख्म,नही मिटेंगे जिनके निशां....

वो जख्म,नही मिटेंगे जिनके निशां....

वाराणसी (रणभेरी): साल 2020 पृथ्वी के लिए आपदाओं का साल बन कर रह गया। इस साल इतनी आपदाएं पृथ्वी पर आई जितनी पहले शायद ही कभी आई हों।साल के शुरुआत में ही कोरोना महामारी ने दुनिया के हर देश को अलग-थलग कर दिया।दुनियां बन्द थी,लॉकडाउन और क्वारंटाइन जैसे जटिल शब्द जीवन का हिस्सा बन चुके थे, लेकिन जो थम जाए वह जिंदगी ही क्या!
प्राकृतिक आपदाएं मनुष्य के नियंत्रण से बाहर हैं।कई आपदाएं मानव निर्मित गतिविधियों का परिणाम होती हैं लेकिन बहुत सी प्राकृतिक आपदाएं प्रकृति का हिस्सा होती हैं। चलिए जानते है साल 2020 में आये ऐसे ही कुछ आपदाओं के संदर्भ में......टिड्डी दल का हमला-2020 के मध्य में टिड्डियों के भीषण हमले ने सभी को हैरान परेशान कर दिया।इससे पहले भारत में टिड्डियों का इस तरह का बड़ा हमला वर्ष1993 में देखा गया था।दरअसल टिड्डियों का पहला दल 2019 की शुरुआत में खाड़ी देशों में पहुँचा।फिर धीरे धीरे वहां से पूरब का रुख किया।पाकिस्तान में तबाही के बाद पश्चिमी और मध्य भारत में अरबों की संख्या में दाखिल टिड्डियों ने करीब चार राज्यों में हज़ारों हेक्टेयर फसल बर्बाद कर दी।2020 में टिड्डी दल का पहला हमला अप्रैल के आसपास राजस्थान में हुआ।मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित इनका प्रकोप गुजरात और पंजाब के भी कुछ स्थानों में रहा।इनसे बचाव के लिए कहीं कीटनाशकों का छिड़काव किया गया तो कहीं ढोल,बर्तन पीटकर इन्हें खदेड़ने का प्रयास किया गया।कहीं कहीं ड्रोन की भी मदद ली गयी।आखिरकार बरसात शुरू होने के बाद टिड्डी दल का प्रकोप  कम होता गया।विशाखापत्तनम गैस लीक–साल 2020 विपत्तियों का साल रहा।आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थित आरआर वेंकटपुरम गांव में 7 मई की भोर 3:30 बजे एक केमिकल यूनिट में गैस लीक होने के कारण एक बच्चे समेत 11 लोगों की मौत हो गयी थी।साथ ही करीब 1000 लोग घायल हुए थे।गैस लीक होने के कारण इन्हें सांस लेने में परेशानी व आंखों में जलन की शिकायत थी।केमिकल फैक्टरी में पॉलिमर से जुड़े काम होते थे,ऐसे में गैस के जहरीले होने की आशंका जताई गई थी जिससे ना सिर्फ वहाँ के कर्मचारीगण बल्कि फैक्ट्री के 3 किलोमीटर के दायरे में 1000 से ज्यादा लोगों की तबियत प्रभावित हुई थी।अम्फान तूफान– 2020 के मध्य में अम्फान नामक तूफान के आने से जनजीवन काफी प्रभावित हुआ।तूफान के कारण कई लोग मारे गए व हज़ारो की संख्या में घर तबाह हो गए।लगभग दो दशकों के बाद पहली बार कोई सुपर साइक्लोन ने भारत मे दस्तक दिया था जिसका केंद्र बांग्लादेश था।इस तूफान के कारण200 किमी प्रति घण्टे की रफ्तार से हवाएं चलने लगी थीं।इस तूफान का सबसे ज्यादा असर पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटीय इलाकों में हुआ।इस तूफान के कारण पेड़ उखड़ गए,संचार बाधित हो गया व सड़कों पर भीषण जलजमाव की स्थिति हो गयी थी।कोरोना काल के कारण  सोशल डिस्टेसिंग करने के उपायों और बड़े पैमाने पर निकासी ने अधिकारियों के लिए स्थिति और अधिक विकराल कर दी थी।असम बाढ़– उष्णकटिबंधीय जलवायु के कारण, असम राज्य में प्रत्येक वर्ष बाढ़ का खतरा बना रहता है।  दैनिक वर्षा के आंकड़ों से अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में वृद्धि होती है, जिससे असम में अत्यधिक बाढ़ आती है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के लिए क्षेत्रों में उच्च अस्थायी और स्थानिक परिवर्तनशीलता को जिम्मेदार ठहराया गया है। 2020 के मानसून के मौसम में, विशेष रूप से मध्य, उत्तर और उत्तर-पूर्व भारत में उच्च वर्षा का अनुभव किया गया, मध्य से सामान्य रूप से 15 सेंटीमीटर अधिक वर्षा हुई। जिस कारण असम में भी बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई।बाढ़ के कारण यहाँ के गांव जलमग्न हो गए व काफी जान-माल की हानि हुई।असम गैस लीक हादसा–विशाखापत्तनम में गैस लीक हादसा टला नही था कि असम के तिनसुकिया जिले के आयल इंडिया लिमिटेड की तेल के कुएं में आग लग गयी जिससे दो लोगों की मौत हो गयी साथ ही कई लोग घायल हो गए।इस तेल के कुएं से 14 दिनों से गैस रिसाव हो रहा था जिसके बाद 27 मई को उसमे आग लग गई।आग की लपटें इतनी भयानक थीं कि इनपर काबू पाने में हफ़्तों बीत गए।गैस रिसाव और इसके खतरे को देखते हुए करीब 650 परिवारों के 2500 लोगों को दूसरी जगह भेज दिया गया। राहत के तौर पर प्रत्येक प्रभावित परिवार को आयल इंडिया लिमिटेड की ओर से 30 लाख रुपये देने की घोषणा की गई। निसर्ग तूफान–बंगाल में चक्रवात 'अम्फान'के तबाही मचाने के बाद देश के सामने 'निसर्ग'नाम का एक और तूफान प्रकट हुआ जिसने अम्फान के मुकाबले कहीं अधिक तबाही मचाई।जून माह में आने  वाले इस तूफान ने जनजीवन अस्त व्यस्त कर दिया।निसर्ग अरब सागर में एक गहरे अवसाद के रूप में शुरू हुआ और भारत के पश्चिमी समुद्र तट से टकराया।महाराष्ट्र और गुजरात इससे सबसे अधिक प्रभावित रहा।महाराष्ट्र के इतिहास मे 72 वर्षों बाद ऐसा तूफान महानगर में आया।इसके अलावा रायगर,पालघर,सिंधुदुर्ग और मुंबई में तेज हवाओं  के चलते कई पेड़ उखड़ गए साथ ही बिजली के खंभों को भी नुकसान हुआ।हालांकि NDRF की टीम ने लाखों की संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया। पंजाब में जहरीली शराब का कहर–सेहत के लिए हानिकारक होने के बावजूद आज भी लोग शराब से पीछा न छुड़ाना नही चाहते।इस कारण अवैध शराब धड़ल्ले से बिकते हैं।जिसका जीवंत उदाहरण है पंजाब में जहरीले शराब की बिक्री,जिसने कुल121 जानें ले ली।जुलाई के माह में पंजाब के अमृतसर,बटाला और तरनतारन में जहरीली शराब पीने से एक के बाद एक 121 लोगों की मौत हो गई थी।इस हादसे के बाद कई अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया था जिसके बाद अवैध शराब के कारोबार के कई मामले सामने आए थे और कुल 54 आरोपित पकड़े गए थे।घटना के बाद नेतागण राजनैतिक रोटियां सेंकते नज़र आए।यह बेहद ही आश्चर्य की बात है कि अकाली दल के शासन काल मे ही वर्ष2012 और2016 में क्रमशः गुरदासपुर और बटाला में ऐसी घटनाएं हुई थी उसके बावजूद कोई नकेल नहीं कसा गया।कोझिकोड विमान हादसा–बाढ़,आग,तूफान के अलावा 2020 विमान हादसे के लिए भी जाना जाएगा।वंदे भारत अभियान के तहत खाड़ी में फसे भारतीयों को वापस ला रहा एयर इंडिया का विमान केरल के कोझिकोड में 7 अगस्त को हादसे का शिकार हो गया था।भारी बारिश के कारण रनवे पर पानी भरे रहने के कारण लैंडिंग के समय विमान फिसलकर लगभग50 फ़ीट गहरी खाई में जा गिरा और उसके दो टुकड़े हो गए थे।रोशनी की कमी को भी हादसे की बड़ी वजह बताया जाता रहा।गनीमत रही कि विमान में आग नही लगी थी जिससे बड़ी संख्या में जान बच गयी।विमान में कुल 190 लोग सवार थे जिसमे से 17 लोगों की मौत हो गयी व 100 से अधिक लोग घायल हुए थे।श्रीसैलम जलविद्युत संयंत्र आग–मई माह में शुरू हुई हादसों की बाढ़ अभी खत्म भी नही हुई थी कि एक और हादसा घटित हो गया।कृष्णा नदी पर बना श्रीसैलम लेफ्ट बैंक पॉवर स्टेशन हैदराबाद से करीब 200 किमी दूर है जिसे तेलंगाना स्टेट पॉवर जेनरेशन कॉरपोरेशन (जेनको) संचालित करता है।संयंत्र में छह इकाइयां हैं जिनकी कुल क्षमता 900 मेगावॉट बिजली उत्पादन की है और पिछले कुछ दिन से बारिश होने से यहां बिजली उत्पादन जोरों से हो रहा था| इसी बीच शॉर्ट सर्किट होने की वजह से यहाँ21 अगस्त की रात भीषण आग लग गयी जिससे नौ लोगो की मौत हो गईं और तीन गम्भीर रूप से घायल हो गए।हादसे के बाद सीएम चंद्रशेखर राव ने हादसे में मारे गए लोगो के परिवार के लिए 25 लाख मुआवजे का एलान किया था।एलुरु संक्रमण– साल 2020 की शुरुआत ही कोरोना जैसी भयानक बीमारी के साथ हुई थी।इसके बाद तो जैसे आपदाओं की बारिश होने लगी।आंध्र प्रदेश के एलुरु में फैली रहस्यमयी बीमारी ने सबको आश्चर्य में डाल दिया था।जानकारों के अनुसार सब्जियों और मछलियों के इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों के सैम्पल में जहरीले तत्वों का सोर्स होने का अंदेशा जताया गया था।वहीं इस रहस्यमयी बीमारी से ग्रस्त होने वालों की संख्या 600 के पार पहुंच गई थी।रिपोर्ट्स में यह साबित भी हो गया था कि पीने के पानी तथा हवा मे भारी तत्त्वों की मौजूदगी नहीं थी।इसी तरह रिसर्चर्स ने यह भी कहा था कि कृष्णा और गोदावरी नदियों की मछलियों में भारी मात्रा में कीटनाशकों व भारी तत्वों की मौजूदगी मिली है।हालांकि प्रशासन ने इन मौतों को रहस्यमयी बीमारी की वजह से नही करार दिया।तारिक़ गार्डन हादसा–नए भारत की दिशा में नित नए नए कार्य किए जा रहे हैं, फ्लाईओवर निर्माण किये जा रहे हैं पर क्या उनकी नींव कमजोर है या इन कार्यों को कराने में धांधली की जाती है?यह प्रश्न इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि आये दिन हादसे होते आ रहे हैं।इसका सजीव उदाहरण है तारिक़ गार्डन हादसा।महाराष्ट्र के महाड़ नामक जगह के काजलपुरा इलाके में एक पांच मंजिला इमारत के गिरने से भारी नुकसान हुआ था।इस पांच मंजिला इमारत में कुल85 लोग रहते थे।हादसा इतना भयावह था कि कई लोग मलबे में दब गए थे।काफी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला जा सका।इसके बावजूद2 व्यक्तियों की मौत हो गई।सवाल यह उठते गए कि 10 वर्ष पूर्व बनी इमारत इतनी जल्दी कैसे गिर गयी? हालांकि मामले के जांच के आदेश दिए गए पर कोई कार्रवाई नही हो पाई।औरंगाबाद रेलवे हादसा–भारत में रेल हादसे आम बात हैं।आये दिन रेल हादसे होते रहे है।उन्ही में से एक है औरंगाबाद रेल हादसा,जिसके बारे में सुनते ही रूह कांप उठती है।महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में 8 मई की सुबह करीब सवा पांच बजे के करीब एक मालगाड़ी की चपेट में आने से 16 प्रवासी मजदूरों की जान चली गयी थी।जालना से भुसावल की ओर पैदल जा रहे मजदूर मध्य प्रदेश लौट रहे थे।वे थकान के कारण रेल की पटरियों पर ही सो गए थे जिसके बाद सुबह सवा पांच बजे तेज़ी से आती मालगाड़ी ने उन्हें कुचल दिया और इस तरह रात  को सोने के बाद वे सुबह का सूरज नही देख पाए।जिस रोटी की तलाश में वे घर से निकले थे वो उनके बेजान शरीर के पास बिखरी पड़ी थी।इस घटना के बाद मजदूरों के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी पर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया।विजयवाड़ा अग्नि कांड–हादसों के साल2020 में आये दिन हादसे होते गए।आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में 9 अगस्त को कोविड केअर सेंटर में आग लगने से 11 मरीजों की मौत हो गयी थी।यह अस्पताल कोविड के मरीजों से भरा  था।दुर्घटना के समय अलार्म की घण्टी नही बजी थी और पिछला दरवाजा खुलने में भी देरी हुई जिस कारण आग लगी थी।जिससे कई मरीज घायल हो गए थे।इसे लापरवाही ही कहेंगे कि इससे पहले 6 अगस्त को गुजरात के अहमदाबाद में नवरंगपुरा इलाके  के कोविड अस्पताल में भी आग लगी थी।इस अग्निकांड में 8 कोरोना पॉजिटिव मरीज़ों की मौत हो गयी थी व भारी संख्या में मरीज घायल हुए थे।इसके अलावा 50 से ज्यादा मरीजों को फायर ब्रिगेड की टीमों ने रेस्क्यू कराया था।दहेज केमिकल फैक्ट्री ब्लास्ट–विजयवाड़ा कांड के बाद गुजरात के ही दहेज में एक केमिकल फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हुआ जिसमें बडी संख्या में  लोगों की मौत हो गयी थी और 57 से अधिक लोग घायल हो गए थे।यह विस्फोट दहेज के इंडस्ट्रियल एरिया में  स्थित एक फैक्ट्री में हुआ था।इस हादसे के बाद 10 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आग बुझाने के काम मे लगी थी।इस फैक्टरी में अति ज्वलनशील केमिकल स्टोर किये गए थे।हादसा इतना भयानक था कि दूर दूर तक धुएँ के गुबार दिखाई दे रहे थे।एहतियात के तौर पर 4800 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया था।सवाल यह उठता है कि इतने हादसों के बाद भी कोई उचित प्रबंध नही किया जाता।अहमदाबाद केमिकल फैक्ट्री ब्लास्ट–हादसों के वर्ष 2020 में हादसे तो जैसे थमने का नाम ही नही ले रहे थे।एक के बाद एक हादसों की बौछार हो रही थी।इन्ही में से एक किस्सा गुजरात का है। अगर साल 2020 में गुजरात को हादसों का शहर कहे तो यह गलत नही होगा क्योंकि ज्यादातर हादसे इसी राज्य में हुए हैं। गुजरात में केमिकल  फ़ैक्टरियों की संख्या अधिक होने के कारण यहाँ आग लगने की घटनाएं घटित होती रहती हैं। इसी के साथ साल के अंत मे गुजरात के अहमदाबाद के रसायन फैक्ट्री में 9 दिसंबर की देर रात एक बजे के करीब आग लग गयी जो इतनी ज्यादा भयानक थी कि 4 घण्टे इस आग को बुझाने मे चार घण्टे लग गए।हालांकि इससे कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन आग लगने के कारण करोड़ो रूपयों का नुकसान हुआ था। इसके बाद से ही वहाँ सुरक्षा के कड़े प्रबंध करने का आदेश दिया गया है।कोरोना वायरस-
अब बात करते हैं कोरोना वायरस की।वर्ष की तो शुरुआत ही कोरोना महामारी के साथ हुई।चीन के वुहान शहर से पिछले साल दिसंबर में निकले कोरोना वायरस ने अब तक दुनिया के 213 देशों में तबाही मचा रखी है।इन देशों में अब तक 8करोड़ 20 लाख से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं जिनमें से 17 लाख 73 हज़ार से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।