Year Ender 2020: कुछ इस तरह गुजर गए, जिनकी उम्मीद न थी

Year Ender 2020: कुछ इस तरह गुजर गए, जिनकी उम्मीद न थी

वाराणसी (रणभेरी): 1. साहबजादे इरफान अली खान: (जन्म: ७ जनवरी १९६७, मृत्यु: २९ अप्रैल २०२०) फिल्म व टेलीविजन के अभिनेता थे। उन्होने द वारियर, मकबूल, हासिल, द नेमसेक, रोग जैसी फिल्मों मे अपने अभिनय का लोहा मनवाया। हासिल फिल्म के लिये उन्हे वर्ष २००४ का फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। वे हिन्दी सिनेमा की ३० से ज्यादा फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। इरफान हॉलीवुड मे भी एक जाना पहचाना नाम हैं। वह ए माइटी हार्ट, स्लमडॉग मिलियनेयर, लाइफ आॅफ पाई और द अमेजिंग स्पाइडर मैन फिल्मों मे भी काम कर चुके हैं। 2011 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया।  60वे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2012 में इरफान खान को फिल्म पान सिंह तोमर में अभिनय के लिए श्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार दिया गया। 2017 में प्रदर्शित हिंदी मीडियम फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया। 2020 में प्रदर्शित अंग्रेजी मीडियम उनकी प्रदर्शित अंतिम फिल्म रही।
प्राथमिक जीवन और शिक्षा: इरफान खान का जन्म राजस्थान में, एक मुस्लिम परिवार में, सईदा बेगम खान और यासीन अली खान के घर पर हुआ था। उनके माता-पिता टोंक जिले के खजुरिया गाँव से थे और टायर का कारोबार चलाते थे। उनका परिवार टोंक के नवाब परिवार से ताल्लुक रखता था। उन्होंने अपना बचपन टोंक तथा जयपुर में बिताया। जयपुर में उन्होंने स्कूली शिक्षा प्राप्त की तथा कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इरफान और उनके सबसे अच्छे दोस्त सतीश शर्मा क्रिकेट में अच्छे थे तथा बाद में, उन्हें साथ में को सीके नायडू प्रतियोगिता के लिए 23 साल से कम उम्र के खिलाड़ियों हेतु प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखने के लिए चुना गया था। दुर्भाग्य से, धन की अभाव के कारण वे प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए नहीं पहुँच सके। उन्होंने 1984 में नई दिल्ली में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति अर्जित की और वहीँ से अभिनय में प्रशिक्षण प्राप्त किया।निजी जीवन: 23 फरवरी 1995 को, उन्होंने ने फिल्म लेखक और साथी एनएसडी स्नातक सुतापा सिकदर से शादी की। उनके दो बेटे हैं: बाबिल और अयान। इंडिया टुडे को २०११ में दिए गए एक साक्षात्कार में सिकदर ने उनके बारे में कहा, "वो हमेशा फोकस्ड रहते हैं। मुझे याद है कि वो घर आकर, सीधे बेडरूम जाकर किताबें पढ़ने लगते थे।" 2012 में उन्होंने अपने नाम की अंग्रेजी वर्तनी "क१ांल्ल" में बीच में एक अतिरिक्त "फ" (आर) डालकर "क११ांल्ल" कर दिया क्योंकि उनके मुताबिक उन्हें अपने नाम में एक अतिरिक्त र स्वर की ध्वनि पसंद है। 2016 में, उन्होंने खान को उनके नाम से हटा दिया क्योंकि वह चाहते थे कि उनका काम उन्हें परिभाषित करे, न कि उनका वंश। निधन: इरफान खान का निधन २९ अप्रैल २०२० को मुम्बई की कोकीलाबेन अस्पताल में हुआ था, जहाँ वे बृहदान्त्र संक्रमण से भर्ती थे। ठीक चार दिन पहले उनकी माता का जयपुर में निधन हुआ था जिसके अंतिम दर्शन नहीं कर पाये थे।  वर्ष २०१८ में उन्हें न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर (अंत:स्रावी ट्यूमर) का पता चला था, जिसके बाद वे एक साल के लिए ब्रिटेन में इलाज हेतु रहे। एक वर्ष की राहत के बाद वे पुन: कोलोन संक्रमण की शिकायत से मुम्बई में भर्ती हुए। इस बीच उन्होंने अपनी फिल्म अंग्रेजी मीडियम की शूटिंग की, जो उनकी अंतिम फिल्म थी। उन्हें अंत:स्रावी कैंसर था, जोकि हॉर्मोन-उत्पादक कोशिकाओं का एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है।

2. सुशांत सिंह राजपूत: (21 जनवरी 1986 - 14 जून 2020) एक भारतीय अभिनेता थे। राजपूत ने अपने करियर की शुरूआत टेलीविजन धारावाहिकों से की थी । उनका पहला शो स्टार प्लस का रोमांटिक ड्रामा "किस देश में है मेरा दिल" (2008) था, उसके बाद जी टीवी के लोकप्रिय शो पवित्र रिश्ता (2009-11) में उनकी प्रमुख/अभिनीत भूमिका थी। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत 2013 में आई फिल्म काय पो छे! से की। इसके बाद उन्होंने शुद्ध देसी रोमांस, पीके, डिटेक्टिव ब्योमकेश बक्शी में काम किया। 2016 की फिल्म एम॰ एस॰ धोनी: द अनटॉल्ड स्टोरी में उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी की मुख्य भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें सराहा गया। अभिनय के अलावा वे विभिन्न कार्यक्रमों जैसे कि र४२ँंल्ल३4ए४िूं३्रङ्मल्ल में भी सक्रिय रूप से शामिल थे। इसके अलावा वे कुछ प्रौद्योगिकी कंपनियों के भी संस्थापक थे। 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत का शरीर पंखे पर लटका हुआ मिला, जिसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की जा रही है ।
उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा पटना के सेंट करेन्स हाई स्कूल तथा दिल्ली के कुलाची हंसराज मॉडल स्कूल से ग्रहण की। उनके अनुसार, 2003 में उन्होंने दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में साँतवा स्थान प्राप्त किया था और अभियान्त्रिकी में स्नातक की डिग्री के लिए उन्होंने इसमें दाखिला लिया। वे भौतिकी के राष्ट्रीय ओलिंपियाड के विजेता भी रह चुके हैं। उन्होंने भारतीय खनि विद्यापीठ विश्वविद्यालय समेत कुल 11 इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाएं पास की। थियेटर और नृत्य में शामिल होने का कारण उनके पास अध्ययन के लिए कम समय बचता, जिससे उनकी पढ़ाई में रुकावटें आईं और उन्होंने विश्वविद्यालय छोड़ दिया। अभिनय में अपना करियर बनाने के लिए उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के चार वर्ष के कोर्स में से सिर्फ तीन वर्ष पूरे कर उसे छोड़ दिया।
विश्वविद्यालय में छात्र रहते हुए उन्हङ्घ: सुशांत सिंह राजपूत को 14 जून 2020 को दिन में मुम्बई के बांद्रा स्थित उनके घर में मृत पाया गया। प्राथमिक सूचना के अनुसार उनके निधन का कारण आत्महत्या बताया गया, और बताया गया कि सुशांत सिंह राजपूत पिछले 6 महीने से अवसाद में थे। उनकी मृत्यु के बाद मुंबई पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की और इसके तहत कई लोगों से पूछताछ हुई। उनकी पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण "दम घुटना" बताया गया।

3. ऋषि कपूर (4 सितंबर 1952 - 30 अप्रैल 2020):  हिन्दी फिल्मों के एक अभिनेता थे।  ऋषि कपूर एक भारतीय फिल्म अभिनेता, फिल्म निमार्ता और निर्देशक थे। वह एक बाल कलाकार के रूप मे काम कर चुके है। उन्हें बॉबी फिल्म के लिए 1974 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार और साथ ही 2008 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार सहित अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चूका है। उन्होंने उनकी पहली फिल्म मेरा नाम जोकर में बाल कलाकार के रूप में  उन्होंने 1973 और 2000 के बीच 92 फिल्मों में रोमांटिक लीड के रूप में प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं।  दो दूनी चार में उनके प्रदर्शन के लिए, उन्हें 2011 का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए फिल्मफेयर क्रिटिक्स पुरस्कार दिया गया, और कपूर एण्ड सन्स में अपनी भूमिका के लिए, उन्होंने 2017 का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार जीता। उन्हें 2008 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।  वह 1973 से 1981 के बीच बारह फिल्मों में अपनी पत्नी नीतू सिंह (1980 में शादी) के साथ दिखाई दिए। ३० अप्रैल २०२० को अस्थिमेरु कैंसर (बोन मैरो कैंसर) के कारण आयी परेशानी से उनकी ६७ वर्ष की आयु में मृत्यु हो गयी। 
1995    हम दोनों    राजेश 'राजू'    ,1995    साजन की बाहों में    सागर    ,1995    याराना   राज    ,1994    ईना मीना डीका    ईना    ,1994    साजन का घर    अमर खन्ना    1994    प्रेम योग    राजकुमार राजू,    1994    पहला पहला प्यार    राज    ,1994    मोहब्बत की आरजू    राजा    ,1994    घर की इज्जत    श्याम    ,1993    गुरुदेव    इंस्पेक्टर देव कुमार    ,1993   इज्जत की रोटी ,1993    श्रीमान आशिक ,1993    साहिबाँ    गोपी    ,1993    साधना   करन    ,1993    दामिनी    शेखर गुप्ता    ,1992    दीवाना    रवि    ,1992    बोल राधा बोल   किशन मल्होत्रा/टोनी    ,1992    हनीमून    सूरज वर्मा    ,1992    इन्तेहा प्यार की    रोहित शंकर वालिया ,1991    बंजा 

4. प्रणव कुमार मुखर्जी: (बांग्ला: जन्म: 11 दिसम्बर 1935, पश्चिम बंगाल-मृत्यु 31 अगस्त 2020 दिल्ली) भारत के तेरहवें राष्ट्रपति रह चुके हैं। 26 जनवरी 2019 को प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है! वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे हैं। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया। सीधे मुकाबले में उन्होंने अपने प्रतिपक्षी प्रत्याशी पी.ए. संगमा को हराया। उन्होंने 25 जुलाई 2012 को भारत के तेरहवें राष्ट्रपति के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। प्रणब मुखर्जी ने किताब 'द कोलिएशन ईयर्स: 1996-2012' लिखा है। बंगाल भारत में वीरभूम जिले के मिराती (किनार्हार) गाँव में 11 दिसम्बर 1935 को कामदा किंकर मुखर्जी और राजलक्ष्मी मुखर्जी के घर जन्मे प्रणव का विवाह बाइस वर्ष की आयु में 13 जुलाई 1957 को शुभ्रा मुखर्जी के साथ हुआ था। उनके दो बेटे और एक बेटी - कुल तीन बच्चे हैं। पढ़ना, बागवानी करना और संगीत सुनना- तीन ही उनके व्यक्तिगत शौक भी हैं। : न्यूयॉर्क से प्रकाशित पत्रिका, यूरोमनी के एक सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 1984 में दुनिया के पाँच सर्वोत्तम वित्त मन्त्रियों में से एक प्रणव मुखर्जी भी थे। उन्हें सन 1997 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का अवार्ड मिला।वित्त मन्त्रालय और अन्य आर्थिक मन्त्रालयों में राष्ट्रीय और आन्तरिक रूप से उनके नेतृत्व का लोहा माना गया। वह लम्बे समय के लिए देश की आर्थिक नीतियों को बनाने में महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। उनके नेत़त्व में ही भारत ने अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के ऋण की 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर की अन्तिम किस्त नहीं लेने का गौरव अर्जित किया। उन्हें प्रथम दर्जे का मन्त्री माना जाता है और सन 1980-1985 के दौरान प्रधानमन्त्री की अनुपस्थिति में उन्होंने केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल की बैठकों की अध्यक्षता की।
प्रणब मुखर्जी को 10 अगस्त को दोपहर 12:07 बजे गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उसी दिन उनके मस्तिष्क में जमे खून को हटाने के लिए उनकी सर्जरी की गई थी। मुखर्जी को बाद में फेफड़े में संक्रमण हो गया। सर्जरी से पहले उनकी कोरोना जांच भी कराई गई थी, जिसकी रिपोर्ट सकारात्मक आई थी। उनका निधन 31 अगस्त 2020 को दिल्ली के अस्पताल में हुआ।


5. राहत इन्दौरी: (1 जनवरी 1950 - 11 अगस्त 2020 ) एक भारतीय उर्दू शायर और हिंदी फिल्मों के गीतकार थे। वे देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में उर्दू साहित्य के प्राध्यापक भी रहे। 11 अगस्त 2020 को पूर्णहृद्रोधव से उनका निधन हो गया। राहत का जन्म 1 जनवरी 1950 को इंदौर में रफ्तुल्लाह कुरैशी और मकबूल उन निशा बेगम के यहाँ हुआ था। इनके पिता वस्त्र कारखाने के कर्मचारी थे। ये अपने माता पिता की चौथे संतान थे। राहत जी की दो बड़ी बहनें थी, जिनके नाम तहजीब और तकरीब थे। उनके एक बड़े भाई अकील और एक छोटे भाई आदिल हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति बुरी होने के कारण उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। 10 साल की उम्र में ही उन्होंने साइन चित्रकारी का कार्य आरंभ किया।  उनकी प्रारंभिक शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर में हुई। उन्होंने इस्लामिया करीमिया कॉलेज इंदौर से 1973 में अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी की और 1975 में बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल से उर्दू साहित्य में एमए किया। इसके बाद उन्होंने बरकतुल्ला विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की और उन्होंने 1985 में मध्य प्रदेश के भोज विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की शिक्षा पूरी की। उर्दू मुख्य मुशायरा नामक उनकी थीसिस के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया था। 10 अगस्त 2020 को उन्हें कोरोनावायरस के लिए सकारात्मक पाया गया और उन्हें मध्य प्रदेश के इंदौर के अरबिंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां 11 अगस्त 2020 को उनका निधन हो गया क्योंकि उनके निधन से पहले उन्हें पूर्णहृदरोध का सामना करना पड़ा था।

 6. मसालों के बादशाह एमडीएच ग्रुप के मालिक महाशय धर्मपाल जी का निधन: मसालों के बादशाह एमडीएच ग्रुप (टऊऌ) के मालिक महाशय धर्मपाल जी का निधन (टऊऌ ड६ल्ली१ ऊीं३ँ) हो गया है। सुबह 5.38 पर उन्होंने अंतिम सांस ली। ??वह 98 साल के थे। कोरोना से ठीक होने के बाद हार्ट अटैक से उनका निधन हुआ। पिछले साल उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। नई दिल्ली देश की दिग्गज मसाला कंपनी महाशिया दी हट्टी (टऊऌ) के मालिक महाशय धर्मपाल जी का निधन (टऊऌ ड६ल्ली१ ऊीं३ँ ठी६२) हो गया है। स्वर्गीय गुलाटी ने अपनी कंपनी के जरिए भारतीय मसालों की पहचान पूरी दुनिया में दिलाई थी। सुबह 5.38 पर उन्होंने अंतिम सांस ली। वह 98 साल के थे। कोरोना से ठीक होने के बाद हार्ट अटैक से उनका निधन हुआ। व्यापार और उद्योग में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए पिछले साल उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मभूषण से नवाजा था। वह अपनी कंपनी के उएड थे और 25 करोड़ उनकी सैलरी थी। 98 साल के गुलाटी अपने मसालों का विज्ञापन खुद ही करते थे। गुलाटी का जन्म 27 मार्च, 1923 को सियालकोट (पाकिस्तान) में हुआ था। 1947 में देश विभाजन के बाद वह भारत आ गए। तब उनके पास महज 1,500 रुपये थे। भारत आकर उन्होंने परिवार के भरण-पोषण के लिए तांगा चलाना शुरू किया। फिर जल्द ही उनके परिवार के पास इतनी संपत्ति जमा हो गई कि दिल्ली के करोल बाग स्थित अजमल खां रोड पर मसाले की एक दुकान खोली जा सके। धरमपाल गुलाटी कक्षा पांचवीं तक पढ़े थे। आगे की पढ़ाई के लिए वह स्कूल नहीं गए। उन्होंने भले ही किताबी शिक्षा अधिक ना ली हो, लेकिन कारोबार में बड़े-बड़े दिग्गज उनका लोहा मानते थे। यूरोमॉनिटर के मुताबिक, धरमपाल गुलाटी एफएमसीजी सेक्टर के सबसे ज्यादा कमाई वाले सीईओ थे। सूत्रों ने बताया कि 2018 में 25 करोड़ रुपये इन-हैंड सैलरी मिली थी। गुलाटी अपनी सैलरी का करीब 90 फीसदी हिस्सा दान कर देते थे। वह 20 स्कूल और 1 हॉस्पिटल भी चला रहे थे।


7. पण्डित जसराज: (जन्म - 28 जनवरी 1230 - 17 अगस्त 2020) भारत के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायकों में से एक हैं। जसराज का संबंध मेवाती घराने से है।  जसराज जब चार वर्ष उम्र में थे तभी उनके पिता पण्डित मोतीराम का देहान्त हो गया था और उनका पालन पोषण बड़े भाई पण्डित मणीराम के संरक्षण में हुआ। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (कअव) ने 11 नवंबर, 2006 को खोजे गए हीन ग्रह 2006 श्ढ32 (संख्या -300128) को पण्डित जसराज के सम्मान में 'पण्डितजसराज' नाम दिया है।जसराज ने संगीत दुनियाँ में 80 वर्ष से अधिक बिताए और कई प्रमुख पुरस्कार प्राप्त किए। शास्त्रीय और अर्ध-शास्त्रीय स्वरों के उनके प्रदर्शनो को एल्बम और फिल्म साउंडट्रैक के रूप में भी बनाया गया हैं। जसराज ने भारत, कनाडा और अमेरिका में संगीत सिखाया है। उनके कुछ शिष्य उल्लेखनीय संगीतकार भी बने हैं। उनकी मृत्यु 17 अगस्त 2020 को अमेरिका के न्यू जर्सी में हुई।  वे अन्य कई पुरस्कारों के अतिरिक्त प्रतिष्ठित पद्मभूषण से भी सम्मानित हो चुके हैं।
मंगल और बृहस्पति के बीच एक हीन ग्रह का नाम पंडित जसराज के सम्मान में अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ द्वारा रखा गया है। सुमित्रा चरत राम अवार्ड फॉर लाइफटाइम अचीवमेंट (2014) , मारवाड़ संगीत रत्न पुरस्कार (2014) संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप (2010),स्वाति संगीता पुरस्करम् (2008) पद्म विभूषण (2000), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1987) पद्म श्री (1975) ,संगीत काला रत्न  मास्टर दीनानाथ, मंगेशकर पुरस्कार ,लता मंगेशकर पुरस्कार ,महाराष्ट्र गौरव पुरस्कार

8. मोतीलाल वोरा: एक भारतीय राजनेता है और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके है। मोतीलाल वोरा का जन्म 20 दिसंबर १९२७ को नागौर, जिला राजस्थान में हुआ था। उनके पिता का नाम मोहनलाल वोरा और मां का नाम अंबा बाई था। उनका विवाह शांति देवी वोरा से हुआ था। उनके चार बेटियां और दो बेटे हैं। उनके बेटे अरुण वोरा दुर्ग से विधायक हैं और वे तीन बार विधायक के रूप में चुनाव जीत चुके हैं। मोतीलाल वोरा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे थे 1980 में उन्हें अर्जुन सिंह मंत्रिमंडल में उन्हें उच्च शिक्षा विभाग का दायित्व सौंपा गया 1988 में उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से त्यागपत्र दे दिया इनका जन्म 20 दिसंबर 1928 को नागौर जिला राजस्थान में हुआ  इनका 93 साल की उम्र मे निधन हुआ।

9. अमर सिंह: (जन्म 27 जनवरी 1956 — मृत्यु 1 अगस्त 2020) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो उत्तर प्रदेश से हैं और समाजवादी पार्टी के नेताओं में से एक रहे हैं। ये अपने हिन्दी ज्ञान और राजनैतिक सम्बंधों भी जाने जाते हैं। इनपर भ्रष्टाचार के विभिन्न मामले लम्बित हैं जो इन्हें व्यापक रूप से अलोकप्रिय भी बनाते हैं। वो समाजवादी पार्टी के महासचिव व भारतीय संसद के उपरी सदन राज्य सभा के सदस्य रह चुके हैं। 6 जनवरी 2010 को, इन्होंने समाजवादी पार्टी के सभी पदों से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने उन्हें 2 फरवरी 2010 को पार्टी से निष्कासित कर दिया।  वर्ष 2011 में इनका कुछ समय न्यायिक हिरासत में भी बीता। अन्तत: इन्होंने राजनीति से सन्यास ले लिया। घोषणा करते हुए इन्होंने कहा- "मैं अपनी पत्नी और अपने परिवार को अधिक समय देना चाहता हूँ। अत: चुनावों की अन्तिम तिथि (१३ मई) के बाद, मैं राजनीति से सन्यास ले लुँगा।" वर्ष 2016 में इनकी समाजवादी पार्टी में पुन: वापसी हुई और राज्य सभा के लिए चुने गये। फिलहाल ये समाजवादी से अलग होकर नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में आए दिन बयान दे रहे हैं। उन्होंने अखिलेश यादव को नमाजवादी भी घोषित कर दिया है। जन्म 27 जनवरी 1956 को अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में एक राजपूत परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम हरीश चंद्र सिंह और माता का नाम शैल कुमारी सिंह था। शनिवार एक अगस्त, 2020 को सिंगापुर में उनका निधन हो गया। वे करीब छह महीने से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। सिंगापुर में ही उनका इलाज चल रहा था। 64 वर्ष की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली। 

10. रामविलास पासवान: भारतीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में से एक थे।  वे लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार में केन्द्रीय मंत्री भी रहे।  वे सोलहवीं लोकसभा में बिहार के हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। वह 9 बार लोकसभा सांसद तथा 2 बार राज्यसभा सांसद रहे।पासवान जी का जन्म बिहार के खगरिया जिले के शाहरबन्नी गाँव में हुआ। वह एक अनुसूचित जाति परिवार में पैदा हुये थे। उन्होंने 1960 के दशक में राजकुमारी देवी से शादी की। 2014 में उन्होंने खुलासा किया कि लोकसभा नामांकन पत्रों को चुनौती देने के बाद उन्होंने 1981 में उन्हें तलाक दे दिया था। उनकी पहली पत्नी राजकुमारी से उषा और आशा दो बेटियां हैं। 1983 में, अमृतसर से एक एयरहोस्टेस और पंजाबी हिन्दू रीना शर्मा से विवाह किया। उनके पास एक बेटा और बेटी है। उनके बेटे चिराग पासवान एक अभिनेता से बने राजनेता हैं। श्री पासवान जी पिछले 32 वर्षों में 11 चुनाव लड़ चुके हैं और उनमें से नौ जीत चुके हैं. इस बार उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा लेकिन इस बार सत्रहवीं लोकसभा में उन्होंने मोदी सरकार में एक बार फिर से उपभोक्ता मामलात मंत्री पद की शपथ ली। श्री पासवान जी के पास छ: प्रधानमंत्रियों केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का 74 साल की उम्र में 8 अक्टूबर 2020 को दिल्ली में निधन हो गया।