म्यांमार में सैन्य तख्तापलट, क्या पड़ेगा इसका असर जानिए-

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट, क्या पड़ेगा इसका असर जानिए-

(रणभेरी): पिछले दिनों भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में सैन्य तख्तापलट हो गया। म्यांमार की सेना ने देश में एक वर्ष के आपातकाल के तहत देश की सत्ता को अपने नियंत्रण में कर लिया हैं। वहीं देश से आयी खबरों में बताया गया है कि स्टेट काउंसलर आंग सान सू की और अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया गया है। तो चलिए जानते हैं सेना द्वारा सत्ता पर नियंत्रण करने के कुछ संभावित कारण क्या हो सकते हैं और इसका दूसरे देशों पर क्या प्रभाव देखने को मिल सकता हैं...

क्या कहता है म्यांमार का संविधान-

सेना के स्वामित्व वाले मयावाडी टीवी ने म्यांमार के संविधान के अनुच्छेद 417 के तहत, जिसमें सेना को आपातकाल में सत्ता अपने हाथ में लेने की अनुमति हासिल है। 
रिपोर्ट में बताया कि कोरोना वायरस का संकट और चुनाव कराने में सरकार का विफल रहना ही आपातकाल के कारण हैं। सेना ने 2008 में संविधान तैयार किया और चार्टर के तहत उसने लोकतंत्र, नागरिक शासन की कीमत पर सत्ता अपने हाथ में रखने का प्रावधान बनाया। वहीं मानवाधिकार समूहों ने इस अनुच्छेद को ''संभावित तख्तापलट की व्यवस्था करार दिया था।

25 फीसदी सीट सेना के लिए आवंटित -

संविधान में कैबिनेट के मुख्य मंत्रालय और संसद में 25 फीसदी सीट सेना के लिए आरक्षित है, जिससे नागरिक सरकार की शक्ति सीमित रह जाती है और इसमें सेना के समर्थन के बगैर चार्टर में संशोधन से इनकार किया गया है। कुछ विशेषज्ञों ने आश्चर्य जताया कि सेना अपनी शक्तिशाली यथास्थिति को क्यों पलटेगी लेकिन कुछ अन्य ने सीनियर जनरल मीन आउंग हलैंग की निकट भविष्य में सेवानिवृत्ति को इसका कारण बताया जो 2011 से सशस्त्र बलों के कमांडर हैं।

हो सकती हैं अंदरूनी सैन्य राजनीति-

म्यांमार के नागरिक एवं सैन्य संबंधों पर रिसर्च करने वाले किम जोलीफे ने बताया , इसकी वजह अंदरूनी सैन्य राजनीति है, जो काफी अपारदर्शी है। यह उन समीकरणों की वजह से हो सकता है। हो सकता है कि यह अंदरूनी तख्तापलट हो और सेना के अंदर अपना प्रभुत्व कायम रखने का तरीका हो। सेना ने उप राष्ट्रपति मींट स्वे को एक वर्ष के लिए सरकार का प्रमुख बनाया है, जो पहले सैन्य अधिकारी रह चुके हैं।

तख्तापलट के बाद अब आगे क्या होगा-

विश्व भर की सरकारों एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस तख्तापलट की  कड़ी निंदा की है, म्यांमार में सीमित लोकतांत्रिक सुधारों को इससे बुरा झटका लगा है। ह्यूमन राइट्स वाच की कानूनी सलाहकार लिंडा लखधीर ने कहा, लोकतंत्र के रूप में वर्तमान म्यामांर के लिए यह काफी बड़ा और बुरा झटका है। विश्व मंच पर इसकी साख को बट्टा लग गया है। वहीं दूसरी ओर इस दौरान मानवाधिकार संगठनों ने आशंका जताई कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और सेना की आलोचना करने वालों पर कठोर कार्रवाई संभव है।