बढ़ती महंगाई से लोगो में आक्रोश, वि‍कास के नाम पर वि‍नाश कर रही सरकार

बढ़ती महंगाई से लोगो में आक्रोश, वि‍कास के नाम पर वि‍नाश कर रही सरकार

वाराणसी (रणभेरी): देश भर में पेट्रोल-डीजल से लेकर एलपीजी तक के भाव आसमान पर है। पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की मुश्किलें बढ़ा दी है। पेट्रोल-डीजल एवं घरेलू गैस के बढ़ाते कीमतों नित्य प्रतिदिन बेतहाशा बढ़ोतरी के खि‍लाफ अब लोगों में गुस्‍सा दि‍खने लगा है।

वहीं वाराणसी में भी आक्रोश देखने को मि‍ल रहा है। देश की आक्रोशित जनता की आवाज सरकार तक पहुंचाने, पेट्रोल डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने एवं पेट्रो पदार्थों पर जरूरत से ज्यादा लगाए गए एक्साइज ड्यूटी को घटा कर आम जनता को राहत देने की मांग को लेकर सुबह-ए- बनारस क्लब के अध्यक्ष मुकेश जायसवाल के नेतृत्व में माल ढुलाई करने वाले पिकअप गाड़ी को विशेश्वरगंज में रस्सी के सहारे खींच कर एवं घरेलू सिलेंडर को भारी तादाद में सड़कों पर रखकर प्रतीकात्मक रूप से सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया गया। 

बढ़ती महंगाई को लेकर अध्यक्ष मुकेश जायसवाल ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना 

पेट्रोल डीजल और एलपीजी के बढ़ती कीमतों को लेकर संस्था के अध्यक्ष मुकेश जायसवाल ने कहा कि 'सखी सैंया तो खूब ही कमात है, महंगाई डायन खाए जात है। उक्त गीत का जोर शोर से प्रचार- प्रसार करके भाजपा 2014 में केंद्र में सत्तारूढ़ हुई। जनमानस में उम्मीद थी कि महंगाई पर लगाम लगेगी। मगर आज का समय उस दिन की फिर से याद दिला रहा है। आज पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं और रसोई गैस की कीमत ने रसोई घर में आग लगा दी है।

साथ ही उन्‍होंने यह आरोप लगाया कि‍ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कोई खास इजाफा नहीं हुआ है। पर केंद्र सरकार भारी एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारे टैक्स के जरिए अपनी तिजोरी भरने में लगी है। अजब विडंबना यह है कि सरकार की आड़ मे तेल कंपनियां भी भारी मुनाफा का फायदा उठा रही हैं। महंगाई के अनुपात में यदि लोगों की आय बढ़े तो कुछ हद तक इसे न्याय संगत माना जा सकता था।

वहीँ मुकेश जायसवाल के अनुसार कोरोना काल मे आर्थिक रुप से आम जन की आय बाजार की उदासीनता की वजह से काफी बदतर स्थिति में पहुंच चुकी है, लोगों को पुनर्स्थापित होने के लिए काफी मशक्कतो का सामना करना पड़ रहा है, जो पार्टी महंगाई को मुद्दा बनाकर सरकार में आई।

उसके राज में रोजमर्रा उपयोग मे आने वाले सामानो मे इतनी मूल्यवृद्धी हो रही है, यह अपने आप में एक सवाल है। अगर सरकार इस गंभीर मुद्दे पर अपनी आंखें बंद रखेगी तो स्वाभाविक है, कि जनता का धीरे धीरे करके सरकार के प्रति आक्रोश बढ़ने के साथ, सरकार से मोहभंग होता जाएगा। जो कि आने वाले दिनों में सत्तारूढ़ सरकार के लिए मुश्किलें पैदा करेगी।