संस्कृति व गंगा को समर्पित पर्व का दिखेगा अद्भुत दृश्य |

रणभेरी न्यूज़ आज ब्रिटिश हुक्मरानों के दौर के ‘रणभेरी' की याद दिला रहा है। नि:संदेह आज पत्रकारिता का स्याह चेहरा अत्यंत ही भयावह होता जा रहा है....क्योंकि आज पत्रकारों की जमात मौन है। मुल्क की अवाम मौन है। सरकार के चाटुकार मौन है। ईमानदारी के झण्डाबरदार मौन हैं। जिले का प्रशासन मौन है। नेताओ का भाषण मौन है। बुद्धजीवियों का प्रकाशन मौन है। क्रांति की मशालें मौन है। इंसानियत के पैरोकार मौन हैं। हर एक मुखर कलम मौन है। इस जिंदा शहर बनारस में हर तरफ छायी विरानगी नही इस बात का एहसास कराती है कि इस अघोषित आपातकाल और तानाशाही सरकार की पूरी व्यवस्था ही मौन है।

बहरहाल! रणभेरी मीडिया वेंचर प्रा.लि. रणभेरी न्यूज़ के माध्यम से समाज के अतीत,वर्तमान और भविष्य के साथ-साथ आम आदमी की ज़िंदगी के रोजमर्रा से सारोकार रखने वाले विभिन्न मसलों पर आवाम की आवाज़ बुलंद करना चाहती है, अपनी ईमानदार कलम की बदौलत रणभेरी समाज में अमन और अहिंसा के लिबास में लिपटा इंकलाबी विचारों का एक ज़बरदस्त तूफ़ान खड़ा करना चाहती हैं। हमारी यह कोशिश होगी कि रणभेरी न्यूज़ के किसी भी ख़बर या विचार से किसी ख़ास जाति, मजहब, क्षेत्र, व्यक्तित्व या राजनीतिक दल का न ही दिल दू:खे और ना ही देश के मान और सम्मान के महल के महाराव और गुम्बद में कोई दरार पड़े...!

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